रानी विक्टोरिया के बाद के ब्रिटिश शासकों — विशेषकर जॉर्ज पंचम और जॉर्ज षष्ठम — के सिक्के बीसवीं सदी में बड़े पैमाने पर चले। ये आज भी पुराने संदूक़ों में आम मिलते हैं।
ये सिक्के ब्रिटिश भारत के अंतिम दशकों की गवाही देते हैं।
पहचान कैसे करें
इन सिक्कों पर संबंधित शासक का चित्र, उनका नाम, मूल्यवर्ग और वर्ष अंकित होते हैं। शासक के नाम और वर्ष से आप आसानी से पहचान सकते हैं कि सिक्का किस काल का है।
चाँदी, निकल और ताँबे जैसी विभिन्न धातुओं में अलग-अलग मूल्यवर्ग जारी हुए।
आम बनाम विशेष
क्योंकि ये सिक्के बहुत बने, अधिकांश आम हैं। दुर्लभता कुछ विशेष वर्षों, धातुओं, टकसालों या बेहतरीन दशा से आती है। इसलिए “जॉर्ज का सिक्का है तो क़ीमती होगा” मान लेना ग़लत है।
हर सिक्के को उसके विशिष्ट वर्ष और दशा के आधार पर देखना चाहिए।
एक अच्छी शुरुआत
सुलभ और सस्ते होने के कारण, ये सिक्के नए संग्राहक के लिए एक अच्छी शुरुआत हैं — इनसे पहचान और दशा आँकना सीखा जा सकता है, बिना बड़े जोखिम के।
यह लेख सामान्य जानकारी है।