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पुराने भारतीय सिक्कों को समझने के लिए दशमलव-पूर्व की मुद्रा-व्यवस्था जानना ज़रूरी है। उस समय रुपया छोटी इकाइयों — आना, पाई और पैसा — में बँटा होता था, न कि सौ पैसों में।

यह व्यवस्था आज अजीब लग सकती है, पर सदियों तक यही प्रचलन में थी।

इकाइयाँ कैसे जुड़ती थीं

इस व्यवस्था में रुपया आनों में, और आना छोटी इकाइयों में बँटता था। चूँकि यह बँटवारा दस के आधार पर नहीं था, हिसाब लगाना दशमलव व्यवस्था से कठिन था।

यही जटिलता आगे चलकर दशमलव व्यवस्था अपनाने का एक कारण बनी।

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सिक्कों की पहचान में मदद

पुराने सिक्कों पर अक्सर इन्हीं इकाइयों में मूल्यवर्ग लिखा होता है — जैसे कोई सिक्का एक आना, तो कोई कुछ पाई का। इन नामों को पहचानना पुराने सिक्कों को समझने की कुंजी है।

इसलिए यह पुरानी व्यवस्था जानना संग्राहक के लिए बहुत उपयोगी है।

एक बीता युग

आना-पाई की यह व्यवस्था अब इतिहास है, पर इसके सिक्के आज भी संग्राहकों के हाथों में उस युग की स्मृति बनकर जीवित हैं।

यह लेख सामान्य जानकारी है।