ब्रिटिश भारत की मुद्रा के समानांतर एक और दिलचस्प दुनिया थी — रियासतों के सिक्के। अनेक देसी रियासतें अपनी टकसालों में अपने सिक्के ढालती थीं, जिनकी शैली और भाषा में बड़ी विविधता थी।
यह क्षेत्र संग्राहकों के लिए विशेष रूप से रोचक है, क्योंकि इसमें असीम विविधता है।
विविधता का कारण
चूँकि हर रियासत की अपनी परंपरा, भाषा और शासक होते थे, उनके सिक्के भी अलग दिखते थे। किसी पर एक लिपि, किसी पर दूसरी; किसी पर एक प्रतीक, किसी पर कुछ और। यही विविधता इस क्षेत्र को समृद्ध बनाती है।
यह विविधता नए संग्राहक के लिए रोमांचक और थोड़ी भ्रामक, दोनों हो सकती है।
एकीकरण के बाद
स्वतंत्रता और रियासतों के भारत में विलय के बाद, ये अलग-अलग सिक्के धीरे-धीरे बंद हो गए और पूरे देश में एक समान मुद्रा आई। इसलिए रियासतों के सिक्के एक बीते युग की गवाही देते हैं।
यही ऐतिहासिक पृष्ठभूमि इन्हें संग्राहकों के लिए अर्थपूर्ण बनाती है।
शुरुआत कैसे करें
इतने विशाल और विविध क्षेत्र में एक रियासत या एक शैली चुनकर शुरुआत करना बेहतर है। नक़ल से बचने के लिए अध्ययन करें और भरोसेमंद स्रोत से ख़रीदें।
यह लेख सामान्य जानकारी है।