मराठा इतिहास से जुड़ा सबसे पहचाना सिक्का है “शिवराई” — ताँबे का छोटा, मोटा सिक्का जो छत्रपति शिवाजी के दौर से जुड़ा माना जाता है और सदियों तक मराठा इलाक़ों में चलता रहा। नाम में ही “शिव” जुड़ा होने से यह भावनात्मक रूप से भी ख़ास है।
यह सिक्का बड़े सोने-चाँदी की तरह चमकदार नहीं, पर इतिहास से इसका जुड़ाव इसे भारतीय संग्राहकों में बेहद लोकप्रिय बनाता है।
सिक्के पर क्या लिखा है
शिवराई पर आम तौर पर देवनागरी अक्षरों में “श्री राजा शिव” जैसे शब्द एक ओर और “छत्रपति” दूसरी ओर मिलते हैं, हालाँकि छपाई अक्सर हल्की या अधूरी होती है — यही इसकी असली पहचान का हिस्सा भी है और चुनौती भी।
क्योंकि ये हाथ से ढाले जाते थे, हर सिक्का थोड़ा अलग होता है। संग्राहक इसी विविधता का आनंद लेते हैं — अलग-अलग टकसाल, अलग-अलग लिखावट, अलग-अलग तौल।
शुरुआत करने वालों के लिए
शिवराई नए संग्राहकों के लिए एक आदर्श सिक्का है: सस्ता, आसानी से मिलने वाला, इतिहास से भरा हुआ। पर सावधानी ज़रूरी है — बाज़ार में नक़ली और “बनाए हुए” शिवराई भी हैं। असली में ताँबे की स्वाभाविक घिसाई और पुरानापन दिखता है।
सलाह वही पुरानी है: थोड़े पैसे में असली अनुभव ख़रीदें, विक्रेता को परखें, और सिक्के की क़ीमत उसकी दुर्लभता व हालत से आँकें, किसी की “करोड़ों” वाली कहानी से नहीं।