शायद ही कोई हफ़्ता जाता हो जब हमें यह सवाल न मिले: "मेरे पास ईस्ट इंडिया कंपनी का बहुत पुराना सिक्का है, उस पर भगवान की तस्वीर है — कितने का बिकेगा?" सवाल पूछने वाले क़सूरवार नहीं हैं; ये चीज़ें बाज़ारों, मेलों और ऑनलाइन दुकानों में "प्राचीन कंपनी सिक्का" कहकर ही बेची जाती हैं, प्रायः 1616, 1717 या 1818 जैसी तारीख़ों के साथ।
सीधा, दस्तावेज़ी सच: ईस्ट इंडिया कंपनी की असली, प्रचलन वाली मुद्राओं पर देवी-देवताओं के बड़े चित्र नहीं ढाले गए। कंपनी के असली सिक्के — मद्रास, बंबई, बंगाल प्रेसीडेंसी और 1835 के बाद के एकरूप सिक्के — फ़ारसी या अंग्रेज़ी लेख, कोट-ऑफ़-आर्म्स, तराज़ू जैसे चिह्न रखते हैं। बड़े-बड़े देवचित्रों और "EAST INDIA COMPANY" के साथ चमकते वे गोल टुकड़े धार्मिक टोकन, स्मृति-पदक या आधुनिक नक़लें हैं — मुद्रा कभी नहीं थे।
ठगी का पूरा तंत्र
इन टुकड़ों के इर्द-गिर्द एक जाना-पहचाना जाल बुना जाता है। पहला धागा: "यह करोड़ों में बिकता है" वाले वीडियो और पोस्ट, जो सामान्य टोकनों को ख़ज़ाना बताते हैं। दूसरा: "ख़रीदार" जो ख़ुद संपर्क करता है और बड़ी रक़म का वादा करता है — बशर्ते पहले "रजिस्ट्रेशन", "GST" या "लैब-टेस्ट" की फ़ीस भर दी जाए। फ़ीस जाते ही ख़रीदार ग़ायब। भारतीय रिज़र्व बैंक सार्वजनिक चेतावनी दे चुका है कि वह पुराने सिक्के-नोट न ख़रीदता है, न इसके एजेंट नियुक्त करता है; अग्रिम फ़ीस माँगने वाला हर "ख़रीदार" ठग है।
याद रखने लायक़ नियम एक पंक्ति का है: असली ख़रीदार आपको पैसे देता है; ठग आपसे पैसे लेता है। और किसी भी सिक्के की असल पहचान भाव-भरे दावों से नहीं, तौल, धातु, लिपि और संदर्भ-कैटलॉग से होती है — जो काम प्रतिष्ठित डीलर या न्यूमिस्मैटिक सोसाइटी चंद मिनटों में कर देती है।
तो हाथ का टुकड़ा क्या करें?
पहले उसे इज़्ज़त से देखिए — भले वह मुद्रा न हो। कई देव-चित्र टोकन मंदिर-यात्राओं की स्मृतियाँ हैं, कुछ पुराने पीतल के सुंदर शिल्प; घर की कहानी के हिस्से के तौर पर उनकी अपनी जगह है। बस उनके सहारे क़र्ज़ मत चुकाइए: बाज़ार में ऐसे टुकड़ों का दाम सामान्यतः धातु और शिल्प भर का होता है — दसियों-सैकड़ों में, करोड़ों में नहीं।
और अगर सचमुच पुराना पारिवारिक सिक्का परखवाना हो, तो रास्ता वही पुराना, सुरक्षित वाला: शहर की न्यूमिस्मैटिक सोसाइटी, प्रतिष्ठित डीलर, स्थापित नीलामी-घर। वहाँ का ठंडा सच "वायरल" वादों जितना रोमांचक नहीं होगा — पर आपका सिक्का, आपका पैसा और आपका भरोसा तीनों आपके पास रहेंगे।