Advertisement

यह बात नए संग्राहक को उल्टी लगती है: पुराने, थोड़े मैले सिक्के को साफ़ करके चमकाना अक्सर उसकी क़ीमत बढ़ाता नहीं, घटाता है। यह संग्रह की दुनिया की सबसे आम और महँगी गलतियों में से एक है।

इसका कारण समझना हर संग्राहक के लिए ज़रूरी है।

मूल सतह और “पैटीना”

समय के साथ धातु पर एक प्राकृतिक परत (पैटीना) बनती है, जिसे संग्राहक सिक्के की प्रामाणिकता और आयु का प्रमाण मानते हैं। सफ़ाई इस मूल सतह को खुरच देती है, जिससे सिक्का “धुला हुआ” और कम प्रामाणिक लगने लगता है।

अनुभवी संग्राहक साफ़ किए हुए सिक्के को तुरंत पहचान लेते हैं और उससे बचते हैं।

Advertisement

ख़रोंच और नुक़सान

रगड़कर या रसायन से साफ़ करने पर सतह पर बारीक़ ख़रोंचें और नुक़सान आ जाते हैं, जो स्थायी होते हैं। एक बार मूल सतह चली जाए तो वह वापस नहीं आती — इसलिए सफ़ाई एक अपरिवर्तनीय गलती है।

चमक कुछ दिनों की, पर नुक़सान हमेशा का होता है।

तो क्या करें

सामान्य नियम सरल है: सिक्कों को साफ़ न करें। उन्हें सावधानी से, नमी से बचाकर रखें, और किनारों से पकड़ें ताकि सतह पर उँगलियों के निशान न पड़ें। संदेह हो तो कुछ न करें।

यह लेख सामान्य मार्गदर्शन है; किसी विशेष, संभवतः मूल्यवान सिक्के के लिए विशेषज्ञ की राय लें।